जानिए छठ पूजा का विज्ञान व योग से संबंध एवं छठ से जुड़े कुछ रोचक तथ्य

By | October 1, 2018

भारत में विशेषकर उत्तर भारत में शायद ही ऐसा कोई व्यक्ति हो जो छठ पूजा (Chhath Puja) के विषय में ना जानता हो. हालाँकि छठ बिहार, झारखण्ड व पूर्वी उत्तर प्रदेश के कुछ ही हिस्सों में मनाया जाता हैं. लेकिन इन जगहों पर रहने वाले लोग पूरे देश में फैलें हुए हैं इसलिए अधिकतर भारतीय लोग इस त्यौहार से परिचित हैं.

यूँ तो इस पर्व के विषय में सभी लोग जानते हैं. लगभग सभी राष्ट्रीय समाचार पत्रों में सूर्य को अर्घ्य देती महिलाओं के चित्र भी छपते हैं लेकिन इस त्यौहार से जुडी बहुत सी ऐसी बातें हैं जिनके बारें में इस त्यौहार को मनाने वाले लोग  भी नहीं जानते. आपको यह पढ़कर अजीब जरुर लग रहा होगा लेकिन यह सत्य हैं.

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छठ पूजा से जुड़े कुछ रोचक तथ्य

छठ पूजा (Chhath Puja) से जुड़े कुछ रोचक तथ्य

नई पीढ़ी हर काम व अनुष्ठान को करने से पहले उसके पीछे के कारण एवं उससे जुड़े विषय के बाड़े में जानना चाहती हैं. इस लेख में हम आपको छठ के त्यौहार से जुड़ी ऐसी ही बातें बताने वाले हैं जिनके विषय में आपको अभी तक पता नहीं होगा. छठ पूजा (Chhath Puja) से जुड़े उनके ऐसी ही प्रश्नों का उत्तर पाने के लिए इस आर्टिकल को पढ़ें. इस आर्टिकल में हमने ‘छठ पूजा’ के विज्ञान व प्रक्रति के साथ संबंध के विषय में बताया हैं जिसे पढने के बाद आप खुद ही इस पूजा के तरफ आकर्षित हो जायेंगे.

सबसे प्राचीन त्यौहार

छठ का पर्व हमारें देश में मनाये जाने वाले सभी त्योहारों में सबसे पुराना हैं. छठ के त्यौहार पर सूर्य भगवान् की पूजा आज भी उसी प्रकार से की जाती हैं जिस प्रकार से वैदिक काल में की जाती थी. आपको जानकार आश्चर्य होगा कि ऋग्वेद में छठ की तरह ही सूर्य की पूजा व अर्चना किये जाने का उल्लेख किया गया हैं. यदि हम कहें कि छठ का पर्व वैदिक काल में भी मनाया जाता था तो अतिश्योक्ति न होगी.

विज्ञान व छठ में संबंध

आप सोचेंगे कि धर्म से जुड़े कामों में विज्ञान कहाँ से आया? तो हम आपको बताते हैं कि हमारे देश में मनाये जाने वाले लगभग हर त्यौहार के साथ कुछ विज्ञान के तथ्य भी जुड़ें हुए हैं. ऐसा ही कुछ छठ के पर्व के साथ भी हैं. यह तो आप जानते ही होंगे कि छठ पूजा का त्यौहार दिवाली के बाद पड़ता हैं और छठ पूजा में 36 घंटें का उपवास रखना होता हैं. यह व्रत आपके शरीर से तला भुना खाने के परिणामस्वरूप हुए साइड इफ़ेक्ट हो हटाने यानि आपके शरीर के लिए विषहरण (Detoxification) का काम करता हैं.

छठ पर्व (Chhath festival) पर डूबते हुए व उगते हुए सूर्य की पूजा की जाती हैं. दोनों ही समय सूर्य की किरणें मनुष्य को लाभ पहुंचाती हैं व सूर्य के पराबैगनी प्रभाव से भी रहित होती हैं. साथ ही पानी में खड़े होकर सूर्य की आराधना करने से मानसिक शांति भी मिलती हैं. पानी व सूर्य की किरणें आपको सकारात्मक ऊर्जा देती हैं.

Know the Science and Yoga of Chhath Puja

जानिए छठ पूजा का विज्ञान व योग से संबंध

छठ पूजा व योग

छठ पूजा (Chhath Puja) का समय कुंडलिनी शक्ति प्राप्त करने का सबसे बेहतर समय है. आधे शरीर को पानी में रखने से ऊर्जा का निकास कम हो जाता हैं व बाकी का शरीर सूर्य से ऊर्जा प्राप्त करता हैं जिसके फलस्वरूप सुषुम्ना उन्नत होती हैं व सूर्य की ऊर्जा रेटिना और ऑप्टिक नसों द्वारा पीनियल, पीयूष और हाइपोथेलेमस ग्रंथियों में जगह लेती है. इस सक्रियता के कारण रीढ़ की हड्डी का ध्रुवीकरण हो जाता है व व्रती को  कुंडलिनी शक्ति प्राप्त हो जाती है. हालाँकि इस कार्य को पूर्ण करने के लिए अभ्यास की आवश्यकता है.

प्राचीनता व आधुनिकता का संगम

छठ त्यौहार (Chhath Puja) में किसी भी देवी देवता की मूर्ति की पूजा नहीं होती. इस त्यौहार पर मुख्य रूप से सूर्य देव व षष्ठी माता (जिन्हें छठ मैया भी कहते है) की पूजा की जाती हैं. सूर्य को धरती पर जीवन का पोषक मानते हुए उन्हें धन्यवाद कहा जाता हैं व षष्ठी माता को प्रक्रति के एक अंश के रूप में पूजा जाता हैं. इस पूजा में किसी भी प्रकार के कर्म कांड की कोई जरूरत नहीं होती.

छठ की (Chhath Puja) पूजा नदी, तालाब आदि के किनारों पर जल में खड़ें होकर की जाती हैं. इस पूजा के समय केवल छठ मैया व सूर्य भगवान् के आराधक ही उपस्थित होते हैं. उनकी जाति या उनका अमीर व गरीब होना कोई मायने नही रखता.

इन सभी तथ्यों के बाद हम कह सकते हैं कि छठ (Chhath Puja) सबसे प्राचीन भारतीय त्यौहार हैं और यह उस समय की भारत की संस्कृति को दर्शाता हैं. ऊंच नीच व भेद भाव से दूर इस त्यौहार की तरफ आकर्षित होना स्वाभाविक ही हैं.

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